जशपुर नगर। जशपुर में विजयादशमी का पर्व इस वर्ष भी ऐतिहासिक राजशाही परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। रंजीता स्टेडियम में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। सदियों पुरानी रियासतकालीन परंपरा और जनभागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
मां खुड़िया रानी, बालाजी भगवान और कुलदेवी मां सिद्धेश्वरी के प्रति आस्था के बीच आयोजित इस समारोह में जशपुर राजपरिवार की 27वीं पीढ़ी के प्रतिनिधि की मौजूदगी आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि लगभग 27 पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी अपनी सांस्कृतिक पहचान, मर्यादा और जनविश्वास के साथ कायम है। उन्होंने इस परंपरा को क्षेत्र की एकता और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक बताया।
राजपरंपरा और जनआस्था का संगम
जशपुर का दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक निरंतरता का भी प्रतीक है। समारोह में उमड़ी भीड़ ने इस परंपरा के प्रति लोगों की गहरी आस्था और जुड़ाव को प्रदर्शित किया। पूरे आयोजन में पारंपरिक उत्साह और धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।
फोटोग्राफर आकाश कुमार सोनी के योगदान की सराहना
समारोह के दौरान स्थानीय फोटोग्राफर आकाश कुमार सोनी के कार्यों की विशेष सराहना की गई। आयोजन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृश्यों को कैमरे में संजोकर आम लोगों तक पहुंचाने में उनके योगदान को उल्लेखनीय बताया गया। राजपरिवार की ओर से उनके निःशुल्क सेवाभाव और समर्पण के लिए आभार व्यक्त किया गया।
शस्त्र पूजन के बाद हुआ रावण दहन
उत्सव का समापन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शस्त्र पूजन और रावण दहन के साथ हुआ। इस दौरान हजारों श्रद्धालु आयोजन के साक्षी बने। पूरा परिसर जय श्रीराम और कुलदेवियों के जयकारों से गूंज उठा।
जशपुर का यह दशहरा एक बार फिर ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता की जीवंत तस्वीर पेश कर गया। 27 पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा ने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और जनमानस से उसके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया।