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मुख्यमंत्री की पत्नी ने बाजार में की धनतेरस की खरीदारी, मिट्टी के दीये खरीदकर बढ़ाया कुम्हारों का हौसला

कौशल्या साय ने स्थानीय उत्पादों को अपनाने का दिया संदेश, प्रदेशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री की पत्नी ने बाजार में की धनतेरस की खरीदारी, मिट्टी के दीये खरीदकर बढ़ाया कुम्हारों का हौसला

जशपुर। धनतेरस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पत्नी कौशल्या साय कांसाबेल के बाजार में खरीदारी करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने स्थानीय दुकानदारों से मिट्टी के दीये और झाड़ू खरीदे। बाजार में उनकी मौजूदगी ने स्थानीय व्यापारियों के बीच उत्साह बढ़ाया। कौशल्या साय ने मिट्टी के दीये खरीदकर न केवल स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संदेश दिया, बल्कि स्थानीय कुम्हारों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करने की अपील भी की।

मिट्टी के दीये खरीदकर बढ़ाया स्थानीय कारीगरों का हौसला

धनतेरस के मौके पर कांसाबेल बाजार पहुंचीं कौशल्या साय ने स्थानीय दुकानदारों से मिट्टी के दीये खरीदे। उन्होंने लोगों से अपील की कि दीपावली के त्योहार पर बाजार में उपलब्ध स्थानीय कुम्हारों द्वारा तैयार मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने से स्थानीय कारीगरों, कुम्हारों और छोटे व्यापारियों को आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है। मिट्टी के दीये हमारी पारंपरिक संस्कृति और विरासत का अहम हिस्सा हैं। इन्हें खरीदने से उन परिवारों की आजीविका को भी सहारा मिलता है, जो पीढ़ियों से इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

स्वदेशी अपनाने से मजबूत होगी स्थानीय अर्थव्यवस्था

त्योहारों के दौरान स्थानीय बाजारों और छोटे व्यापारियों को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर देते हुए कौशल्या साय ने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को अपनी खरीदारी में शामिल करने की अपील की। उनका यह संदेश स्थानीय कारीगरों के हुनर को सम्मान देने और पारंपरिक व्यवसायों को जीवित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रदेशवासियों को दी धनतेरस और दीपावली की शुभकामनाएं

इस अवसर पर कौशल्या साय ने प्रदेशवासियों को धनतेरस और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

धनतेरस पर बाजार पहुंचकर मिट्टी के दीये और झाड़ू की खरीदारी करने के साथ उन्होंने आम लोगों के बीच यह संदेश दिया कि त्योहारों की खुशियां तभी सार्थक होंगी, जब उनके साथ स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों की खुशहाली भी जुड़ी हो।

 
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