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खिलाड़ियों के नाम पर आयोजन, लेकिन समापन पर सुविधाएं गायब! खुले आसमान के नीचे गुजरी रात

सात ब्लॉकों से पहुंचे 300 से अधिक खिलाड़ियों को झेलनी पड़ी परेशानी, खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

खिलाड़ियों के नाम पर आयोजन, लेकिन समापन पर सुविधाएं गायब! खुले आसमान के नीचे गुजरी रात

अंबिकापुर। ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को मंच देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित सरगुजा ओलंपिक का समापन खिलाड़ियों के लिए परेशानी का सबब बन गया। तीन दिनों तक चली खेल प्रतियोगिता के अंतिम दिन खेल एवं युवा कल्याण विभाग की व्यवस्थाओं की ऐसी पोल खुली कि जिले के सातों ब्लॉकों से पहुंचे 300 से अधिक खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ा। समापन समारोह के बाद खिलाड़ियों को न तो समय पर भोजन-पानी मिला और न ही घर लौटने के लिए परिवहन की व्यवस्था की गई। नतीजतन दूर-दराज के क्षेत्रों से आए खिलाड़ी कड़ाके की ठंड में देर रात तक खुले आसमान के नीचे बैठकर वाहनों का इंतजार करते रहे।

दरअसल, जिला मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित सरगुजा ओलंपिक में जिले के सातों ब्लॉकों से 300 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। तीन दिनों तक चली इस एथलेटिक्स प्रतियोगिता के शुरुआती दो दिनों में खिलाड़ियों के लिए भोजन-पानी सहित अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। लेकिन प्रतियोगिता के अंतिम दिन विभागीय तैयारियों की हकीकत सामने आ गई। समापन समारोह संपन्न होते ही खिलाड़ियों के सामने घर वापसी का संकट खड़ा हो गया।

सबसे बड़ी परेशानी उन खिलाड़ियों को हुई, जो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतियोगिता में शामिल होने पहुंचे थे। प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद उन्हें घर पहुंचाने के लिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। वहीं, भोजन और पेयजल की व्यवस्था भी नदारद रही। घंटों इंतजार के बावजूद जब कोई इंतजाम नहीं हुआ तो खिलाड़ी ठंड के बीच खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हो गए। जिस आयोजन में खिलाड़ियों के उत्साह और प्रतिभा को सम्मानित किया जाना था, उसी आयोजन के अंतिम दिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ा।

मीडिया की दखल के बाद हरकत में आया प्रशासन

खिलाड़ियों की परेशानी की जानकारी मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जिला पंचायत सीईओ रोमा श्रीवास्तव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया। इसके बाद खिलाड़ियों के लिए भोजन-पानी और घर वापसी के लिए परिवहन की व्यवस्था कराई गई। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद खिलाड़ियों को राहत मिली, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने आयोजन की व्यवस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।

खिलाड़ियों की सुविधाओं को लेकर उठे सवाल

गौरतलब है कि सरगुजा ओलंपिक का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग की देखरेख में किया जा रहा था। ऐसे में इतने बड़े आयोजन के समापन दिवस पर खिलाड़ियों के भोजन, पेयजल और परिवहन जैसी बुनियादी जरूरतों का इंतजाम नहीं होना विभागीय तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में 300 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी थी, तो समापन के बाद उनकी सुरक्षित घर वापसी की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या आयोजन से पहले खिलाड़ियों की संख्या और उनके आवागमन की जरूरतों का आकलन नहीं किया गया था?

जिला पंचायत सीईओ रोमा श्रीवास्तव ने मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना होगा कि खिलाड़ियों को हुई इस परेशानी के लिए जिम्मेदारी तय कर संबंधित लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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