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फर्जी टीपी से लकड़ी परिवहन का खुलासा

वन विभाग ने झारखंड नंबर का ट्रक पकड़ा, दस्तावेजों की जांच जारी

फर्जी टीपी से लकड़ी परिवहन का खुलासा

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग में अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। लुंड्रा क्षेत्र में कार्रवाई के बाद अंबिकापुर में भी वन अमले ने लकड़ी से लदे एक ट्रक को जब्त किया है। विभाग के अनुसार, ट्रक में परिवहन संबंधी फर्जी ट्रांजिट पास (TP) के सहारे लकड़ी ले जाई जा रही थी। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जब्त लकड़ी का मूल्य दो लाख रुपये से अधिक बताया गया है।

IFS कुणाल मिश्रा के नेतृत्व में कार्रवाई

वन विभाग की इस कार्रवाई का नेतृत्व युवा IFS अधिकारी कुणाल मिश्रा ने किया। अधिकारियों के मुताबिक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) अरुण कुमार पांडेय के निर्देश और सरगुजा वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) दिलराज प्रभाकर के मार्गदर्शन में तस्करी के विरुद्ध निगरानी बढ़ाई गई थी। इसी दौरान मिली सूचना के आधार पर वन अमले ने संदिग्ध ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली।

झारखंड नंबर के ट्रक में मिली लकड़ी

कार्रवाई के दौरान झारखंड पंजीयन क्रमांक JH09 AS 2401 वाले ट्रक को रोका गया। तलाशी में उसमें बड़ी मात्रा में लकड़ी लदी मिली। वन विभाग को आशंका है कि लकड़ी के परिवहन के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। विभाग ने ट्रक और लकड़ी को जब्त कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज

विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मामले में छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम, 2001 के नियम 3, 4, 5, 6 एवं 22 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इसके अलावा भारतीय वन अधिनियम की धारा 52(1) के तहत लकड़ी और परिवहन में इस्तेमाल वाहन की जब्ती की कार्रवाई की गई है।

तस्करी के नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रहा विभाग

वन विभाग अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त दस्तावेजों की जांच के जरिए लकड़ी के स्रोत, परिवहन मार्ग तथा इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में यदि किसी बड़े नेटवर्क या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

लगातार कार्रवाई से तस्करों पर बढ़ा दबाव

सरगुजा संभाग में लगातार हो रही कार्रवाई को अवैध लकड़ी कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, कथित तस्करी के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति या संगठित गिरोह की भूमिका अभी जांच का विषय है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और उसकी संलिप्तता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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